Monday, 6 May 2024

रूह


जिस्म उठाकर
सर पर
अपने,
कंधों पर ले
मन का बोझ,
अक्ल की लाठी
लेकर चलती,
किसी नदी सी
रोज़ सफ़र में
रहती
रूह /

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