"विजयी बनो"
दुविधा में व्यर्थ समय न करो
उठ जाओ प्रिय , इतना न डरो
तुम आये हो रणभूमि में
अब उठकर सीना तान लड़ो
हे वीर सुनो !
ये सब के सब हैं काल ग्रास
मत सोच अधिक , मत हो उदास
पल पल ये जीवन रीत रहा
सब बीत रहा , अब आगे बढ़ो !
हे वीर सुनो !
तुम भाग के जाओगे भी जहां
ये पाप प्रपंच मिलेगा वहां
इस झूठे पापी लश्कर से
जैसे भी बने , हिम्मत से भिड़ो
हे वीर सुनो !
क्या होगा , क्या न होगा कल
इस सोच से अब बाहर तू निकल
मैं सत का सारथी युग-युग से
मैं श्री हूँ ,साथ हूँ ,विजयी बनो !
हे वीर सुनो !
रणधीर सुनो !
मैं कृष्ण
समक्ष खड़ा हूँ , सुनो !