Sunday, 21 December 2025

 

क्या ख़ुदा है ??

 

जो ये कहता है "ख़ुदा है "

उस ने देखा ही  नहीं

जो ये कहता है "नहीं है"

उस ने खोजा भी नहीं

दरअसल दोनों को रब का

कोई पता ही नहीं /

 

अब कोई कैसे बताए

कि घूमता पहिया

कहाँ से होता है

शुरू बोलो /

 

अब मैं तुम को ये बताता हूँ

सही कौन है

सुन -

कोई भूखा या प्यासा

मिले जो रस्ते में

तो ख़ुदा से ये न पूछो

कि ये भूखा क्यों है ?

तुम उस प्यासे को

पानी पीला दो बेहतर है

वो जो पानी ख़ुदा ने

मुफ़्त में दिया है तुम्हें /

 

सतपाल ख़याल

 

जावेद जो अख़्तर है ,उनकी नज़्र /

Sunday, 25 August 2024

"विजयी बनो"

"विजयी बनो"
हे वीर सुनो !
धर धीर सुनो !
मैं कृष्ण
समक्ष खड़ा हूँ , सुनो !
दुविधा में व्यर्थ समय न करो
उठ जाओ प्रिय , इतना न डरो
तुम आये हो रणभूमि में
अब उठकर सीना तान लड़ो
हे वीर सुनो !
ये सब के सब हैं काल ग्रास
मत सोच अधिक , मत हो उदास
पल पल ये जीवन रीत रहा
सब बीत रहा , अब आगे बढ़ो !
हे वीर सुनो !
तुम भाग के जाओगे भी जहां
ये पाप प्रपंच मिलेगा वहां
इस झूठे पापी लश्कर से
जैसे भी बने , हिम्मत से भिड़ो
हे वीर सुनो !
क्या होगा , क्या न होगा कल
इस सोच से अब बाहर तू निकल
मैं सत का सारथी युग-युग से
मैं श्री हूँ ,साथ हूँ ,विजयी बनो !
हे वीर सुनो !
रणधीर सुनो !
मैं कृष्ण
समक्ष खड़ा हूँ , सुनो !

Tuesday, 7 May 2024

ऊँगली पर सियाही -सतपाल ख़याल

ऊँगली पर सियाही 
लगाओ 
फिर  
दिल्ली की तरफ़ पीठ 
और आसमान की तरफ़ 
हाथ उठा कर, 
अगरबत्ती जला कर
बैठ जाओ |


Monday, 6 May 2024

सियासत की चिल्म

सियासत की चिल्म
भरता है कानून
और न्याय, आँख पर पट्टी बाँध कर
सियासती जूतों के फीते बाँधता है, जनाब
दुबक पर बैठ जाओ घर पर
कल सुबह काम पर भी तो जाना है

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बाप को चाकलेट देकर
जागिंग के लिए भेजती
और सीटी बजाकर
किसी लड़के को पास बुलाती
भारतीय युवा पीड़ी की प्रतीक
एक लड़की
लाइफ़ के मज़े लेती है।
कुछ भी खरीदो
बस..मज़ा लो
बनियान, परफ़्यूम, टुथपेस्ट, पान मसाला....

बाज़ार दीमक की तरह
चाट रहा है
मध्यम वर्ग को और
लूट रहा है हमारी संस्कृति
हमारे पारिवारिक मूल्य
हमारे घर
और हम
परिवार सहित देखते हैं
टेलिवीज़न

कल इक पत्ता बोला मुझसे


मैं शाखों से जुड़ा हुआ हूँ
लेकिन तुम अपने जीवन से
जुड़े नहीं हो
पकड़ रखा है जीवन तुमने
डर-डर कर तुम सारा जीवन खो देते हो
जैसा तुमको होना चाहिए
कब होते है
विरह में तुम गीत वस्ल के गाते हो
और मिलन में यही सोचते रहते हो
कल बिछुड़ेंगे

मुझको देखो
जैसा होना चाहिए बिल्कुल वैसा हूँ
घाम-शीत सब सहता हूँ
चुप रहता हूँ
तेरे जैसे तीन पड़ाव पार करूँगा
हाँ ! मैं भी तेरे जैसे इक दिन
मर जाऊँगा
लेकिन तेरी तरह मेरा नाम नहीं है
ज़ात नहीं है, धर्म नहीं है
कोई वेद-कुरआन नहीं है
तुम में केवल एक खोट है
जो मिलता है तुमको वो स्वीकार नहीं है
सुख है तो संतोष नहीं है
दुख में तो तुम मर जाते है
जैसा होना चाहिए
बोलो,
कब होते हो
मेरी तरह केवल होना सीखो तुम
तेरा होना, होना न होकर, विद्रोह है बस
बस आगे को इक अंधी सी दौड़ है बस
कैसे होना है बस तुम सीखो मुझसे
मेरा केवल होना ही है योग मेरा
केवल होना ही है वेद-कुरान मेरा
केवल होने की युक्ति मुझसे सीखो
मेरा होना बोझ नहीं है
मेरे होने पर भी संकट आता है
लेकिन मेरा होना केवल होना है
विद्रोह नहीं है
सच पूछो तो ज़ात-मज़हब जंज़ीर है बस
और जिसको तुम ईश्वर कहते हो
वो कुछ और नहीं है
वो भी केवल होना है
लेकिन होना सरल बहुत है
इसमें ही कठिनाई है
तुमको उलझी बातों में रस आता है
क्यों है? कब से? क्योंकर है
ये धर्म है तेरा
तुमने केवल होने का रस चखा नहीं है
शायद इसीलिए ही अब
दुख के सिवा कुछ बचा नहीं है
न तुम देखने वाले हो और न हीं
तुम कोई मंज़र हो
बस तुम हो...
यही होना तुम्हारी नियति है
इस होने में रत्ति भर भी दुख ही नहीं है
सच पूछो तो सुख भी नहीं
केवल होना ही आनंद है बस
उत्सव है बस केवल होना॥

लाजिकल

 मशीनें लाजिकल होती हैं

किसी फल का टूटकर जमीन पे गिरना
लाजिकल होता है

लाजिकल होते हैं रात और दिन
सर्दी गर्मी सब लाजिकल हैं

हाँ लेकिन सपने लाजिकल नहीं होते
न खुली आँख के
और न ही बंद आँखों के

  क्या ख़ुदा है ??   जो ये कहता है "ख़ुदा है " उस ने देखा ही   नहीं जो ये कहता है "नहीं है" उस ने खोजा भी नहीं ...