सांसों की अंतिम रेखा छूने से पहले
मरना मत
क्रोध हो
मान हो, अपमान हो
रोग हो
शोक हो
ताप हो
संताप हो
टूट जाना
बिखरना मत
सांसों की अंतिम रेखा छूने से पहले
मरना मत /
बहते रहना
तेज़ धार में
तिनका बनके
जब तक खुद न पानी फैंके
किसी किनारे
डरना मत
सांसों की अंतिम रेखा छूने से पहले
मरना मत /
हो जाती है कभी अमावस
बरसों लम्बी
हो सकता है
निकले भी न
चांद कभी
रहे अंधेरा
सारा जीवन
हो सकता है
हाँ ! ऐसा भी हो सकता है
लेकिन
सांसों की अंतिम रेखा को
जिस दिन भी तुम छू जाओगे
निश्चित है की
ताप मिटेगा
संताप मिटेगा
रोग-शोक सब मिटटी
में मिल जायेंगे
मान-सम्मान
दौलत -शोहरत
इज्ज़त
सब कुछ
मिट जाने का नियम अटल है।
फिर क्यों मरना
क्यों डरना
रुकना क्यों
झुकना क्यों
जैसे तैसे
सब कुछ सह कर
चुप रहकर
चलते रहना
सांसों की अंतिम रेखा छूने से पहले
मरना मत
रुकना मत
चलते रहना .चलते रहना ..चलते रहना।
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