Monday, 6 May 2024

भ्रम - एक नज़्म


उधार की सोच
भीड़ में तब्दील होते
भेड़ों के जैसे लोग ,
किसी नुक्क्ड़ पे बैठे
मवालियों सी
सियासत /
पक्ष -विपक्ष
दांयें-बांये
राहों-चुराहों पर
सियासत की चैस पर
पियादोँ की तरह
बैठे लोग/
दुनिया की एक चौथाई
गरीब आबादी ,
ख़ुदकुशी करते किसान ,
करोड़ों की मलाई खाते
कॉरपोरेट ,
धर्म ,जाति ,गौत्र
छोटा -शहर
बड़ा शहर
भेस और भाषाओं
में बंटे
असभ्य लोग /
स्कूलों में पॉर्न -स्टार
हीरोइनों के गीतों पे थिरकता
बचपन ,
हॉस्पिटलों में
मरते बच्चे /
कॉपी -पेस्ट मैसज़
के जैसे फेक
अर्बन कालोनियों में बसे
मॉडर्न लोग ,
गंदे नालों पर
बसी बेबस
बीमार झुग्गियां /
अश्लीलता और फूहड़पने
से भरे ज़हन ,
फटी हुई जीन
पहने नशा करते
नौजवान /
दो जून रोटी के लिए
आफिस में बॉस के
जूते चाटते
क्लीन शेव
लोग /
वर्कर के जितनी
सैलरी पे काम करते
इंजीनियर ,
स्कूलों में
दो-दो हज़ार पे काम करती
पढ़ी-लिखी औरतें ,
और..
झूठी सुर्खियां बांटते
बिके हुए अखबार
किसी अभिनेता की तरह
अदाकारी करते
बेहूदा
तिलमिलाते
न्यूज़ ऐंकर ,
चौबीस घंटे
ये भ्रम फैला
रहे हैं कि
ऑल इज़ वैल /

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