Monday, 6 May 2024

"केंचुए "


चुप-चाप
लाशों की तरह
कंकरीट के जंगलों में
गमलों में फूल लगा कर
मस्त रहते हैं /
रेंगने के
क़िस्से सुनते हैं
केंचुए,
फिर खुश होते हैं
धीमे-धीमे
रेंग कर/
इनकी नसें
ठंडे खून से
भरी रहती हैं ,
आप इन्हें कुचल दें
मार दें
गाली दे दें
ठोकर में रखें
जलील करें
ये शांत रहते हैं /
इनके आस-पास
कोई है ही
नहीं
जो चलता हो
सर उठा कर /
हरे ,लाल ,सफेद नीले
रंग –बिरंगे
रीढ़ विहीन केंचुए
मिटटी चाट कर
मिटटी होते केंचुए
कितने मुफ़ीद हैं
किसी भी राजा के लिए /

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