Monday, 6 May 2024

टनल में फंसे मज़दूर


टनल के अंतिम छोर पर प्रकाश ..
केवल मुहावरों में होता है ,
यथार्थ में तो
हर टनल के अंतिम छोर पर
होती है
एक और अंधेरी , लम्बी ..
टनल /
प्रकाश तो
किसी धनाढ्य सेठ की
तिजोरी में होता है,
मज़दूर की जेब में
टनल के मैले –कुचैले अँधेरे जैसी
एक दिन की दिहाड़ी होती है
१००-२०० रूपये बस /
टनल के अन्दर हों या बाहर
अँधेरे में रहते हैं मज़दूर ,
क्या निकाल पायेगी
सियासत की वर्टिकल ड्रिल
टनल के अन्दर और बाहर
फंसे मज़दूरों को ??

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