सुनो बुद्ध!
जिस दुख की नदी के
तुम किनारे बैठे रहे
उस नदी को साहस से
पार किया है मैने/
सुनो बुद्ध!
इस जीवन को
जस का तस
स्वीकार किया है मैनें/
सुनो बुद्ध !
बस मेरे अधरों पर
तुझ जैसी
मुस्कान नहीं है
ये मुस्कान मुझे
उधार दे दो
बस /
क्या ख़ुदा है ?? जो ये कहता है "ख़ुदा है " उस ने देखा ही नहीं जो ये कहता है "नहीं है" उस ने खोजा भी नहीं ...
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