सियासत की चिल्म
भरता है कानून
और न्याय, आँख पर पट्टी बाँध कर
सियासती जूतों के फीते बाँधता है, जनाब
दुबक पर बैठ जाओ घर पर
कल सुबह काम पर भी तो जाना है
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क्या ख़ुदा है ?? जो ये कहता है "ख़ुदा है " उस ने देखा ही नहीं जो ये कहता है "नहीं है" उस ने खोजा भी नहीं ...
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मैं शाखों से जुड़ा हुआ हूँ लेकिन तुम अपने जीवन से जुड़े नहीं हो पकड़ रखा है जीवन तुमने डर-डर कर तुम सारा जीवन खो देते हो जैसा तुमको होना चाहिए ...
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"विजयी बनो" हे वीर सुनो ! धर धीर सुनो ! मैं कृष्ण समक्ष खड़ा हूँ , सुनो ! दुविधा में व्यर्थ समय न करो उठ जाओ प्रिय , इतना न डरो त...
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धर धीर सुनो ! मैं कृष्ण समक्ष खड़ा हूँ ,सुनो ! दुविधा में व्यर्थ समय न करो उठ जाओ प्रिय ,इतना न डरो तुम आये हो रणभूमि में अब उठकर सीना तान ...
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